कांग्रेस सरकार में जांच में आए बड़े मामलों की भाजपा सरकार के आते ही पड़ताल तेज हो गई है। सबसे पहले ईओडब्ल्यू में होने वाली जांच का रिकाॅर्ड तलब किया गया है। जल्द ही स्मार्ट सिटी, ई-टेंडर और रोहित नगर सोसायटी की जांच में नया मोड़ आएगा।
ईओडब्ल्यू के एडीजी राजीव टंडन ने विवादास्पद मामलों की जांच से जुड़ी फाइलें तलब की है। उन्होंने स्मार्ट सिटी कंपनी के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर वाले 300 करोड़ के टेंडर से जुड़ी फाइलें बुलवाईं हैं। इस टेंडर में बीएसएनएल ने एचपीई को 25 करोड़ ज्यादा में काम देने का आरोप लगाया था। इसमें एक आईएएस अफसर के खिलाफ आरोप लगाए गए थे। रोहित नगर सोसायटी की जांच की फाइलों की पड़ताल होगी। ई-टेंडर घोटाले की जांच कुछ तेजी के बाद अचानक से रोकी गई थी। इसके बाद किसी तरह की कार्रवाई भी नहीं हुई।
कमलनाथ सरकार में रोहित नगर गृह निर्माण संस्था के 24 पदाधिकारियों पर दिसंबर में एफआईआर की गई थी। इसके कर्ताधर्ता घनश्याम सिंह राजपूत को अवैध प्लॉट की बिक्री और खरीदी समेत धोखाधड़ी और अन्य मामलों में केस के बाद गिरफ्तार किया गया था। ईओडब्ल्यू की कार्रवाई में भाजपा से जुड़े नेताओं को विशेष निशाने पर लेने का आरोप लगा था। ई-टेंडर घोटाले में भाजपा नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के लिए आधार बनाया गया था। पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के निज सहायक वीरेंद्र पांडे की गिरफ्तारी हुई थी।